Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Friday, 18 September 1987

मैं तुम्हारा देवता नहीं

तुम कहेते हो की तुम
हमारे बारे में सोचते रहेते हो ;

हम कैसे माने ?

जब ये कभी नहीं बताया की
क्या सोचते हो !

मगर मैं बताके रहूंगा
मैं क्या सोचता हु  -

बारमासी के इस फूल की
बनाके माला
तुमारे गले में डालना चाहूँगा ,

फिर ,
एक और बार
तुमारे कानो में दोहराना
चाहूँगा ,
कही है जो बात हज़ार बार ,

" मै तुम्हे चाहता हूँ  -
  चाहे पत्थर बनाके गाड दो ,

  मैं तुम्हे सराहता हूँ ;

  अगर हो शके ना  ओठ से
  पैर से ही छू लो ,

  मैं तुम्हारा देवता नहीं
  तुम्हारे राह की धूल
  बनना चाहता हूँ  "

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Abu Dhabi Sea-shore  /  18  Sept  1987

Monday, 14 September 1987

हज़ारो मिल के फांसले

येह एस्सेन ,

यहाँ की बादले गरजती नहीं
क्यूंकि
यहाँ की धरती तरसती नहीं  ;

मेरे - तुमारे बिच है
हज़ारो मिल के फांसले

हो भी जायेंगे
मेरी वफ़ाओ के फ़ैसले ;

मैं हूँ
तुमारी धडकती हुई सांसो में
छूपा हुआ तूफ़ान ?

के
पिघलते बर्फो की चट्टान  ?

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Essen  /  Germany