Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Saturday, 30 May 2015

अभी मैं चला

जिस राह पर कभी तुम चले
उस राह  पर
अभी मैं चला ,

दिख रहे हैं जो दूर तक
तुम्हारे पैरों के निशान
उसी को हमसफ़र समज़  कर
अभी मैं चला ,

और उठती हैं
हर एक निशान से
तुम्हारे पायल की आवाज़

सुनता हूँ
मैं अकेला ही समज़ता हूँ

वो मेरी अमानत हैं

जहां हो वहाँ तक
क्या पहुंचती हैं

मेरे इस
सिमटते साँसों की  सरगम  ?

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31  May  2015

Wednesday, 13 May 2015

क्यों बेबश रहें ?

ना हमें ज़ाँखना था 
तुम्हारी आंखोमे ,

तुम्हे भी तो मुख 
मोड़ना था 
हमारी नज़रो से 

क्यों बेबश रहें ?

जानते हुए भी के 
हमारे बीच के फांसले 
कभी कम ना होंगे 

क्यों दूरसे 
साँसों को सांस से 
मिलाते रहें ?

ना जो तुम्हे मंज़ूर थी  
ना हमें ,

वो होनी थी 
वो हमारी तक़दीर थी 

अगर शिकवा हैं 
तो खुद से

तुमने तो 
बखूबी निभाई 
हमारी बेवफाई 

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14   May   2015  








Tuesday, 12 May 2015

ना कोई इंतज़ार हैं

वो भी दिन थे
जब हज़ार बार याद करते थे

क्या तुम्हे पता था
की

हर एक बार
तुम्हारे नाम को
हज़ार बार गुनगुनाते थे  ?

अब
न  तो नाम हैं
न याद हैं
ना किसीको पता हैं
ना कोई इंतज़ार हैं

हैं तो शाम की तन्हाईयाँ

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13  May  2015








Tuesday, 5 May 2015

बिखरे हुए लम्होंकी

हवा में बिखरे हुए 
तुम्हारे लम्होंकी 
हिफाज़त करता हूँ 

अब क्या बच्चा है 
युम्हारी यादों के सिवा ?

उन वफाओं की 
इबादत करता  हूँ 
जिनके सहारे 
हर एक नयी 
साँस लेता हूँ 

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06   May   2015