Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Friday, 8 January 2016

ज़माना करेगा बदनाम !

ज़माना कहता :
सिया : राम  /   राधे : श्याम ;

क्यों न कोई कहता ,
तेरा नाम  :  मेरा नाम  ?

क्यों मैं ही अकेला 
लिए हुए हूँ तेरा नाम  ?

वोह भी छूप छूप के 
सुबहो शाम  !

तुमने तो कभी पुकारा नहीं 
लेके मेरा नाम  !

जब मैंने पूछा ,
" क्या खफा मेरी  ?
  तेरे लबो पे क्यों न आता 
  तेरे पीया का नाम  ?  "

तो बोली :
" ज़माना करेगा बदनाम  !  "

--------------------------------------------------------------------

09  Jan  2016  /  #
  

Thursday, 7 January 2016

खामोशी का गीला किससे करू ?

अगर तुम आज 
सामने बैठी होती तो 
क्या बात करता  ?

गीत गाता या 
खामोश रहता  ?

जब सामने बैठी थी 
तब तो कुछ कहे ना पाया  !

अब तो ,
खयालों से ही गुफ्तुगू का 
समय आया  ;

मैंने जो सुनना चाहा 
वो तो तुम बोल न पायी  !

और कुछ गुनगुनाई तो 
आवाज़ मुज़ तक ना आयी ;

क़यामत से तो लड़ शकता हूँ ,
तुम्हारी खामोशी का गीला 
किससे करू  ?

-----------------------------------

08  Jan   2016  /  #

Wednesday, 6 January 2016

किनारे को क्या रोना था ?

तुम और मैं 
एक ही नदी के दो किनारे थे  ;

तुम खूब जानती थी 
किनारे क्यों न मिल पाएंगे  ;

अगर मिल जाते तो 
ना रहती नदी !

मिलने का एक ही रास्ता था ,
समंदर की बाहों में मिल कर 
अस्तित्व को ही खोना था  !

जब पानी से पानी मिल गया 
तब 
किनारे को क्या रोना था  ?

--------------------------------------

07  Jan  2016 / #

ये कैसी महफ़िल हैं ?

ये किस पथ का राही  हूँ  ?

जिस पड़ाव पर ठहरना था 

वहाँ चलता रहा ,
और अब 
चलने को जी नहीं चाहता  !

ये कौन सी राहें  हैं 

जहां मंज़िले आती रही ,
आके जाती रही ,
मगर रास्ता ना रुका  !

ये क्या दयार हैं 

जहां रात आके रुक गई ,
पर चाँद ना निकला  ?

ये कैसी महफ़िल हैं 

जहां लोग तो आते हैं 
शराब भी पीते हैं 
मगर 
बिना पहचाने 
चले जाते हैं  ?

--------------------------------


06  Jan  2016  #