Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 28 March 2016

बिना साकी तरस गया हूँ !

अब 
बहारे मुझे बुलाती नहीं ,

जिन्हे मैं बुलाता हूँ 
वो आती नहीं  !

बुलाते बुलाते 
सूख गया गला मेरा ,

कहाँ है वो 
सूरा और सूरों का मेला  ?

बिना साकी तरस गया हूँ  !

कैसा है ये ज़िन्दगी का जमेला
जहां 
जीने  के पहले ही मर गया हूँ  !

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29  March  2016  /  #
  

Thursday, 24 March 2016

ज़माने से हारा हूँ

पंख जलने से पहले 
परवाने ने  ना पूछा ,

"  शमा ,
    कहाँ है तेरा सिंगार  ? "

जब तुम मिली 
सपनो के साये में ,

ना मैंने पूछा ,

" सुरा ,
  कहाँ है तेरा 
  हेम का हार  ? "

ज़माने से हारा हूँ 
गमो से नहीं  !

कभी तुमने ही कहा था ,

" मंज़िल की सोच सोच कर 
  राह को बर्बाद न कर  "

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25  March  2016  /  #





Wednesday, 16 March 2016

कभी न कभी

मैं फूल हु मोगरा का ,

तेरे पैरो में गिरा कई बार ,
सजदे किये बार बार ,

न तूने उठाया 
न देखा जुकके ,

एक आश लिए जीता हूँ ,

कभी न कभी तो 
तेरी आँखों में शर्म आएगी ,

 कभी तो मेरी हालात पर तरस खायेंगी ,

कभी तो पैरोंसे उठाके 
ज़ुल्फ़ें में लगाएंगी  !

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17  March  2016 / #


Monday, 14 March 2016

कारवां नयी चल देंगी

दिवाने का दिल है 
दिवाना रहेगा ,

शमा हो न हो 
परवाना तो परवाना रहेगा  !

अगर परवाने के 
कटे है पंख ,
तो शमा भी बुज़ने चली है  ;

नए चराग जल जायेंगे  !

फूल एक मुरज़ाया तो क्या 
बहारे रुक जाएँगी  ?

नयी शोले लपकेगी 
कारवां नयी चल देंगी  ;

रह जायेंगे गीत जो 
मेरे तुम्हारे ,
दुनिया गुनगुनायेगी  !

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15   March   2016  /  #

Sunday, 13 March 2016

रुकना था तो मुज़े ,

मेरी हालात सुनके 
क्या करोगी  ?

किये जो सितम 
बेवफा बहारो ने ,
तुन्हे भी ज़ेला है  !

और तुम तो 
रो भी नहीं शकति,
आंसू ओ को 
थमा भी नहीं शकती  !

रुकना था तो मुज़े ,

तेरे मेरे बीच 
ज्यादा नहीं ,
फासला सिर्फ 
दस कदम का था  !

क्यों न घूम कर पकड़ा 
तेरा हाथ ?


जब तुमको माना सहारा 
क्यों तुम्हारा साथ छोड़ा  ?

आया हु आज तेरे दर 
सवालातो की बरात लेकर ,

इनका जवाब है 
न तेरे पास 
न मेरे !



  

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14  March  2016  /  #



Monday, 7 March 2016

तुम्हारे बिछड़ने के बाद

मेरे तुम्हारे बीच 
पत्थर की कोई 
दिवार तो ना थी  ;

था तो सिर्फ 
मकड़ी का जाला ,

एक फूंक से ही हट जाता  !

मुक्कद्दर को मंज़ूर 
कुछ और था ,

गरम साँसे मेरी 
टकरा के तुम्हारी ठंडी आहो से 
लौट आई  !

अगर तुम मायुश थी 
तो मैं मजबूर था  ;

लोग मानते है 
मैं गीत लिखता हूँ  :

एक तुम जानती थी 
जिगर के खून से सींच कर 
ये गुल खिलते थे  !

तुम्हारे मिलने से पहले 
अकेला था ,

तुम्हारे बिछड़ने के बाद 
गमो के अँधेरे से 
घिरा हुआ हूँ  !

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08  March  2016  /  #

Sunday, 6 March 2016

सारथी मेरा

हज़ारो साल पहले 
कृष्ण ने कहा :

अर्जुन ,

युद्ध तो ख़त्म हुआ 
चारो तरफ मुर्दे ही मुर्दे है ,

बचे हो 
तुम और मै ,

और ये रथ 

भिष्म के तीरों से 
जो कभी का जल गया है ,

उतर  जाओ आज पहले 
तुम्हारे  उतरने तक 
 मैंने बचाये रख्हा है  ;

हज़ारो साल बाद 
सवाल उठता है ,

मेरा रथ तो 
अंदर ही अंदर  जला है 
सारथी मेरा उतरके ,
कभी का चला है  !

शायद ज़माने के 
कुछ  तीर 
ज़ेलना  बाकी  है  !

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07  March  2016  /  #












Saturday, 5 March 2016

मैं तो गाता रहूंगा

तुम बुला शको नहीं 
तो कोई बात नहीं 
मैं बुलाता रहूंगा ;  ,

तुम सून शको नहीं  
तो कोई बात नहीं 
मैं तो गाता रहूंगा ;

ज़माने से पूछके 
बहारे आती नहीं  !

देखेगा कोई  ?
ए सोचके तो 
शाम रंग लाती नहीं  !


जब जब तूने किया सिंगार
मैं तो आयने में ही छिपा था  !

मैं क्या देखता हूँ 
ए सोचके तो तुम 
अंग छुपाती नहीं  ! 

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06  March  2016  /  # 

Friday, 4 March 2016

मुज़े भी ले चलो

एक दिन 
एक लहर आई थी ,
उतरके आसमान से 
एक परी आई थी  ;

आज तुम्हे 
फिर आसमान में ढूंढता हूँ ,

मगर तुम तो हो 
सितारों से भी आगे  !

मेरी नज़र कहाँ तक भागे  ?

जहां तुम हो 
मुज़े भी ले चलो ,

पकड़ के हाथ मेरे 
सपनो के जहां में 
ले चलो  !

जहाँ कभी अलग होना नहीं ,
रोना धोना नहीं 
मौसम का आना जाना नहीं ,
बहारो का मुरजाना नहीं ,

ऐसा जहां 
वहाँ से 
फिर आना नहीं  

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05  March  2016  /  #



Wednesday, 2 March 2016

अब तो शाम होने चली है

तुम कहती हो 
रोने से क्या फ़ायदा  ?

मगर 
न रोना भी मेरे बस में नहीं  !

जब जब खता खाई 
ज़माने से ,
तुम्हारी याद आई  ;

क्या यादों के सहारे भी 
कोई जी शकता है  ?

सोचता रहता हूँ 
तुम्हारे अरमानो को 
समज़ पाया , या नहीं  ?

मेरे ह्रदय की चित्कार में 
तुम्हारी आह को 
सुन पाया , या नहीं  ?

अब तो शाम होने चली है 

रात का अन्धेरा क्या 
सुखुन लाएगा  ?

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02  March  2016  /  #