Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Saturday, 30 April 2016

फिर मुझे दोष ना देना !

'गर तुम गाना बंध  करो तो 
मैं लिखना बंध करू ;

फिर मुझे ना दोष देना ,

क्यूं की 
आसमान ज़ूक जाएगा 
नदिया के पानी रुक जायेगा 

'गर  बहारे उलझ गई तो 
मुझे दोष ना देना  !

मई के ये पहले दिन 
तुम्हारी पलक के निचे ,

छाँव 
कड़ी धुप में बदल गई 
तो मुझे दोष ना देना  !

'गर तुम बन्ध  करोगे गाना 
तो 
क्या आंसू रुक जायेगे  ?

बरस ना छोड़ कर 
क्या 
बादलों तरस जायेंगे  ?

मैं लिखना बंध करू तो 
तुम्हारे पायल की जंकार 
ज़माना न सून पाएगा ,

मुझे फिर दोष ना देना  ;

करू जो बंध लिखना 
तो परिंदे भी 
उड़ न पाएंगे ,

घोशले में 
पाँखें  सिमट कर 
तुम्हारा नाम भी 
ना ले पाएंगे  !


मई के ये पहले दिन ,
गुल्मोर के  गुल लाल ,
खिलने से पहेले ही 
मुरजाएगे  !

फिर मुझे दोष ना देना  !

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01  May  2016





Wednesday, 27 April 2016

वादों को कैसे भुलाऊं ?

धीरे से गाता हूँ 

गुंगुनाके कानो में ,

प्राणो को  तुम्हारे 
जगाता हूँ  !

कहेती हो तुम ,

"  यादो को भुला दे  "

ये भी तो कहे दो ,

" वादों को कैसे भुलाऊं  ? "

तुम्हारे पास 
मेरे सवालों का जवाब नहीं ,

मेरे पास 
तुम्हारे खयालो का हिसाब नहीं  !

तुम भुलाना चाहो तो भुलादो ,

यादो के सहारे 
मुझे और कुछ चलना 
बाकी है  !

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27  April  2016  /  #



Saturday, 23 April 2016

मुझे तो निभाना है


तुम्हारे लिए ही गाता हूँ 
क्या सून पाती हो ?

जो लिखता हूँ तुम्हारे लिए 
मेरी ही आँखों से 
पढ़ लिया करो  !

तूने निभाया वादा 
इस जनम का ,

मुझे तो निभाना है 
जनम जनम का  !

जितना लिखू 
गाऊ इससे भी ज्यादा ,

तुम सून ना पाओ 
ना ये मेरी मर्यादा  !

मैं गाता हूँ 
तुम सुनते जाओ  !

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24  April  2016  /  #

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Wednesday, 13 April 2016

लाल में लाल मिल जायेगा

कबूल ,

गमो की धूप में 
मेरे जिस्म  के रंग 
कुछ फिक्के ज़रूर पड गए है ;

मगर आपने 
मेरे खून का रंग देखा  ?

आपकी अमानत समज़ कर 
वो तो आज भी सलामत है  !

उसे अगर कोई इंतज़ार है 
तो क़यामत का ;

तभी तो वो 
तुम्हारे लहू से 
मिल पाएगा ;

जब मेरा काल आयेगा 
तब लाल में लाल 
मिल जायेगा 

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14  April 2016  /  #

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Friday, 1 April 2016

भूल न पाऊंगा ,

तुम्हारे गांव में
सबसे पहले तुम्हे देखा ,

देख के बोली आँखे मेरी ,

" अब बचा है काम क्या मेरा  ? "

ठीक ही तो बोली !

जब जब चाहू आज भी
मूंद कर
उन्ही आँखों से
छवि तेरी ढंडोली  !

मिली थी जैसी उस दिन
भूल न पाऊंगा ,

पता नहीं
तेरी आँखों ने क्या देखा था  !

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02  April  2016  /  #