Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Saturday, 18 June 2016

है कोई समजने वाला

वैसे तो दुश्मन था 
संसार सारा ,
ये ना हुई कोई बात ,

मैं तो खुद 
अपनों से हारा  !

शिकवा करे तो किससे  ?
जिसका न हो 
कोई सहारा  ?

क्या 
तुम्हे भी कुछ कहना है  ?

कहो भी तो कैसे  ?
लेके उधार , मेरी आवाज़  ?

भूल ही जाओ  !

मैंने सूनी ,
तुम्हारे लिए 
वही काफी मानो  !

है कोई समजने वाला ,
किसके लिए 
बनायी मैंने ,

चुन चुन के पिरोये 
फूलों की 
ए गीत  माला  ?

------------------------------------------------------------

19  June  2016

www.hemenparekh.in / Poems ( Hindi )  





Thursday, 16 June 2016

'गर तुम मेरी खुदा हो तो

खुदा तो चाहता है  
हर बन्दे को ;

मुज़े ऐसा खुदा मिला 
जिसने ,
मुज़े छोड़के 
ना किसी और को चाहा  !

जिन्हो ने तुमने 
प्यार के काबिल ना समझा ,

वो तुम्हे भूल चुके है  ;

' गर वो तुम्हारी बात छेड़ते है 
तो मुज़से , सहा नहीं जाता  !

किसी और की यादों में 
मै तुम्हे , देख नहीं पाता  ;

ना तुम्हारी बातों को 
ना तुम्हारी यादोंको ,

किसी को छीन ने नहीं दूंगा  !

मेरे गुनाहों की सज़ा 
मुज़े अकेले ही भुगतने दो ;

मेरे रंजोगमो में 
मुज़े , अकेले ही 
तड़पने दो  !

'गर तुम मेरी खुदा हो तो 
क़यामत के दिन तो 
जरूर मिलोगी  !

-----------------------------------------------------------

17  June  2016

www.hemenparekh.in > Poems ( Hindi )


Monday, 13 June 2016

कभी तो सूना करो

मैं गाता हूँ  ;

हँसता कम 
और रोता ज्यादा हूँ  !

जो मनभाई वो धून में 
गीत तुम्हारे सजाता हूँ  ;

क्या 
कभी तुम्हारे मन को 
भाता हूँ  ? 

क्या करूँ ,
तुम सोचती हो कुछ ज्यादा 
और सुनती कम हो  !

कभी तो सूना करो 
तुम्हारे पायल की  झंकार में 
मेरे ही गीत छुपे हैं  !

--------------------------------------------------------------------------------

14   June   2016

www.hemenparekh.in >  Poems  ( Hindi )

Sunday, 12 June 2016

कोई नयी बात तो नहीं !

आज भी बादलों पूछते है ,

" है कोई सन्देशा 
  यक्ष कन्या के नाम  ?
  अप्सरा जैसी कोई 
  उर्वशी / मेनका के नाम  ? "

मेरी आंखोसे जो बहे ,
वो आंसू ओ से बने 
बादलोको 
कहूं भी क्या  ?

सन्देशा तो है ,
बहुत है  ;

तुम्हारा पता कहाँ  ?

बादलों पूछते है ,

" कहाँ जाके बरसना है  ? "

जब नहीं तुम्हारा 
कोई अंदेशा ,
तो कहाँ भेजू सन्देशा  ?

जिस मोड़ पर छोड़ के गयी 
वहीँ बैठा हूँ ,

जिस राह पर चली 
उस राह पर ,
डूबती नज़रे लगाए हूँ  ;

और सोचता हूँ ,

मिलके तुमसे बिछड़ना 
कोई नयी बात तो नहीं  !

पिछले कई जनमो में 
तूने यही किया ,
और आनेवाले जन्मों में भी 
यही करोगी  !

-----------------------------------------------------------------------------------------------

13  June   2016

www.hemenparekh.in >  Poems  ( Hindi ) 

Tuesday, 7 June 2016

क्या हुआ तेरे वादों का ?

मेरे अंतर में  
छाये है वो बादलों ,
आँखों के रास्ते 
एक एक कर 
आभ में बिखर जाते है  !

तुम्हारी यादों को लेकर 
बरसना चाहते है  !

और पूछते है ,

"  क्या हुआ तेरे वादों का  ?

तू ने तो कुछ 
कस्मे भी खायी थी  ;

क्या हुआ ,
मीट मरने की बातों का  ?

क्या तेरी शमा 
बुझ गयी तो 
वादे निभाने की 
रस्मे भी छूट गयी  ?


करे तो कहाँ जाके करे 
बयां ,
तेरी बेवफाईओ को  ?

न कोई सूननेवाली है ,
ना 
तेरी हालात पर 
कोई रोने वाली है  ! "


आशियाँ किसी का जला कर 
मैं ,
घोंसला अपना 
बना न पाया ;

निभाए न जो 
वादे किसीके ,

किसी और को तो 
काम आया ! 

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

08  June  2016

www.hemenparekh.in > Poems ( Hindi )