Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 26 September 2016

क्या हाल बना रखहा हैं ?

शमा बूज़ गयी तो क्या ?
परवाना तो  धुंए से भी प्यार करता है  !

'गर धुंआ बिखर गया तो क्या  ?
बाती से ही बात कर लेंगे  !

दुबारा न जल शकता दिया 
तो क्या  ?
परवाने को भी 
नए पंख नहीं आते  !

जो मुमकिन न था 
उसे हकीकत में बदलने में 
उम्र कट गयी  ;

गमो का क्या  ?
उसकी तो अब 
आदत सी हो गयी  !


तुम न पूछ पाओगी ,
" क्या हाल बना रखहा हैं  ? "


खुशहाल का क्या ,
उसे तो हमे 
दफ़न कर रखहा हैं  !
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27  Sept   2016

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Monday, 5 September 2016

तूने माफ़ कर दिया

मै शेर नहीं लिखता 
इस लिए 
शायर तो नहीं  ;

मगर तुम्हे गैर माना 
इस लिए 
कायर ज़रूर हूँ  !

अफ़सोस तो ये  है ,
इतना भी समज़ न पाया ,
'गर मै कमजोर था 
तो ,
तुम तो मजबूर थी  !


कैसे बोल पाती  ?

तूने ज़िन्दगी से 
समझौता कर लिया ;

बेवफाइयों का इलज़ाम 
अपने पर क्यों ले लिया  ?


ज़माना का नहीं 
तुम्हारा ,
गुनाहगार तो मैं हूँ ,

इसी लिए 
उठाये चला हूँ 
ग़मों की गठरी ,

तूने माफ़ कर दिया 
खुद को कैसे करू  ?

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06  Sept  2016 








Thursday, 1 September 2016

कभी तो होता ठुकराया !

कहेके ,
" जा ,
  तुज़े करती हूँ नफ़रत  ",

कभी तो होता ठुकराया  ;

मेरी बेवफाइयों के बदले 
कभी तो किया होता 
पराया  !

मेरी जफ़ाओं का बदला 
वफाओं से क्यों चुकाया  ?

क्यों न कहा  एक भी बार ,

" जा ,
   तू न मेरा मित ,
   ना मै तेरी प्रीत   ? ",

गमोसे 
कुछ राहत मिल जाती  !

भुलाने तेरी याद 
कुछ बात तो बन जाती  !

दिल की गहरी तन्हाइयो में ,
जी लेने की 
कुछ आश तो बन पाती  !

काश  !

तूने , कभी तो होता ठुकराया  !

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02  Sept  2016 

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